झालावाड़ जिले में पर्यटन एवं आर्थिक विकास एवं भोगोलिक विशेलेषण झालावाड़ के पर्यटन स्थलों के अध्ययन

नीलोफर अगवान, डाॅ. कुशल सिंह मेहता

Abstract


भारत देश अर्थव्यवस्था वाला देश है। देश में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, निरक्षरता, क्षेत्रीय विभिन्नता, वनोन्मूलन द्वारा पर्यावरण ओद्योगिक शहरीकरण आदि की समस्या को दूर करने के लिए पर्यटन को विकसित किया जाना चाहिए।
भारत में अनेक क्षेत्रों में जिसने विशेषकर राजस्थान पर्यटन में विशेष रूची का स्थान रखता है। यहां पर अनेक ऐतिहासिक धरोहर किले व हवेली, सांस्कृतिक सम्पन्नता में विविध जनजातियां रंग-बिंरगें परिधानांे की विविधता लोक संगीत व नृत्य अनोखी संस्कृति व आनन्दमय प्राकृतिक सौन्दर्यता विभिन्न जीव उद्यान, स्वर्णिम बालू रेत के स्तूपों के कारण देशी - विदेशी पर्यटकों के स्वाभाविक रूप से आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। ये सभी कारण राजस्थान में ग्रामीण पर्यटन के विकसित होने के प्रमाण प्रस्तुत करते है। किसी भी यात्रा का पर्यटन से सम्पर्क स्थपित हो जाता है। पर्यटन एक उद्योग है जो लोगों को उनके आगमन पर नियत स्थान की तरफ आकर्षित करने उसे वहां तक पहुंचाने, आवासित करने, मनोविनोद करने तथा उनकी वापसी पर उन्हें घरों तक पहुंचाने से संबंधित है।


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