कृष्णा सोबती के कथा साहित्य में स्त्री मुक्ति का प्रश्न

लक्ष्मी विश्नोई

Abstract


कृष्णा सोबती समकालीन कथा साहित्य की नींव हैं। महिला लेखिकाओं में अब तक भी सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली रचनाकार हैं। कृष्णा सोबती का जन्म 18 फरवरी 1925 को पंजाब के शहर गुजरात में हुआ जो बँटवारे के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बन चुका है।शायद इसीलिए उनके साहित्य में विभाजन की त्रासदी कई रंगों में सामने आती है। आज़ादी के बाद कथा साहित्य से अपने लेखन की आरंभ करने वाली कृष्णा सोबती आज की सर्वाधिक चर्चित रचनाकार हैं। उनकी पहली कृति 'लामा' 1950  में प्रकाशित हुई। 'डार से बिछुड़ी, ज़िंदगीनामा, ऐ लड़की, मित्रो मरजानी, हमहशमत, तिन पहाड़,' जैसी कालजयी रचनाओं का सृजन करने वाली कृष्णा सोबती को भारतीय साहित्य का सर्वोच्च सम्मान ‘भारतीय ज्ञानपीठ’ भी मिल है। इसके साथ ही साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य शिरोमणि सम्मान, शलाका सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार, साहित्य कला परिषद पुरस्कार, कथा चूड़ामणि पुरस्कार, महत्तर सदस्य, साहित्य अकादमी द्वारा सम्मान मिल चुका है।


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References


ऐ लड़की, कृष्णा सोबती, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, पृष्ठ 27

डार से बिछुड़ी, कृष्णा सोबती, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, पृष्ठ 17

सुरजमुखी अंधेरे के, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, पृष्ठ 73

दिलोदानिश, कृष्णा सोबती, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, पृष्ठ 157

वही, पृष्ठ 56

डार से बिछुड़ी, राजकमल प्रकाशन दिल्ली, पृष्ठ 67

दिलो दानिश, कृष्णा सोबती, पृष्ठ -81

http://www.jagran.com/sahitya/literature-news-krishna-sobti-is-a-hindi-fiction-writer-and-essayist-11294114.html


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