भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में एनी बेसेंट की भूमिका

प्रदीप कुमार गंगवार

Abstract


भारत में श्रीमती एनी बेसेंट का आना सामाजिक, राजीनतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आदि विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन लाने वाला रहा। यूँ तो उनका भारत आगमन थियोसोफी के प्रचार के निमित्त था, लेकिन जब वह भारत पहुँची तो उनके कार्य का दायरे ने व्यापक फलक ले लिया। उन्होंने न सिर्फ टुकड़ों में बँटे भारतीयों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया, बल्कि अतीत की यादों के सहारे समाज को गौरवान्ति कर आगे की राह भी दिखाने का कार्य किया। यह भी एक निश्चित तथ्य है कि उनके आगमन से पहले भारत में बहुत से धार्मिक अंधविश्वास और जाति-धर्म का विषबेल फैल चुका था। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इसी विषबेल को खत्म करने की थी। इसी कारण उन्होंने सबसे पहले विभिन्न क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा को बढ़ावा देने का कार्य किया। सेन्ट्रल हिन्दू कालेज, वसंता गर्ल्स कालेज आदि की स्थापना उनके द्वारा अंधविश्वासों की मजबूत दीवार को तोड़ने हेतु की गई थी। यह भी सही है कि उनके आगमन के समय भारत की राजनैतिक स्थिति बड़ी सोचनीय हो गई थी। जितनी ढपली, उतने राग बज रहे थे। कुछ बागी बन अंग्रेजी शासन का प्रतिकार कर रहे थेए कुछ नरम दल और गरम दल की आड़ में आपस में ही लड़ने का कार्य कर रहे थे। ऐसी स्थिति में एक राजनीतिक आंदोलन की जरूरत थी जो पूरे देश को एक साथ लाकर खड़ा कर सके। इस आंदोलन को आगे बढ़ाने का कार्य श्रीमती एनी बेसेंट ने होमरूल लीग की स्थापना के माध्यम से किया।

Full Text:

PDF

References


सरकार, सुमित, आधुनिक भारत, राजकमल प्रकाशन, 2014, पृ.181

चन्द्र, विपिन, भारत का स्वतंत्रता संघर्ष, हिन्दी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2015 पृ. 146

सिंह, अयोध्या, भारत का मुक्ति संग्राम, ग्रंथ शिल्पी प्रकाशन, दिल्ली, 2012, पृ. 268

- Review for The Last Four Lives of Annie Besant by Arthur H. Nethercot


Refbacks

  • There are currently no refbacks.